Monday, 29 December 2025

तुम


 जब तुम साथ हो - तब तुम ही साथ हो,

 जब तुम साथ हो - तब तुम ही साथ हो,

जब मैं अकेला हूं तब भी तुम्ही साथ हो।

जब कोई बात हो तब बस खामोशी हो,

जब कोई बात न तब भी बस खामोशी हो।

प्रेम के एहसास में कोई स्पर्श न हो,

जब स्पर्श हो तब अनछुआ प्रेम हो,

स्पर्श तो बस स्पर्श हो,

प्रेम अनछुआ हो।

स्पर्श हो तो अंतर्मन मन का स्पर्श हो,

अंतर्मन जब अकेला हो तब तुम्हारा स्पर्श हो।

जब सारे सुख प्रेम सुख को ढूंढते हो,

तुम मेरे, मैं तुम्हारे,

प्रेम को बस जी रहे हों।



                                                                                                   हेमंत चौहान "वत्स"


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